Wednesday, September 30, 2009

चंद अशआर

जीने वाले तो सदियों को जी लेते है लम्हा-ए-हयात में,
लाख मुख्तसर वक्फा सही 'शकील' उम्र-ए-हयात का|


ख़ुद-ब-ख़ुद खुल जाएगा दरे कफस- ए-सय्याद,
दिल में जब जज़्बा-ए-परवाज़ होगा पैदा 'शकील'|

ज़िंदगी में गर रवानी है,
तो खुशक सेहरा में भी पानी है|

दुनिया को वजूद में लाना था,
आदम तो सिर्फ़ एक बहाना था|

अदम में थी मेरी रूह जसदे खाकी से पहले,
मुझे कौन जानता था मेरी ज़िंदगी से पहले|

मेरी ज़िंदगी में है वहम ऐ खुदा! तेरा,
जो मैं न होता 'शकील' तो तू क्या खुदा होता|

मैं गुनाहों, सबाब का वो मीज़ान हूँ 'शकील',
है खुदा पर भी यकीं और शैतान पर भी भरोसा मेरा|

9 comments:

  1. आपके ब्लोग पर आ कर अच्छा लगा! ब्लोगिग के विशाल परिवार में आपका स्वागत है! अन्य ब्लोग भी पढ़ें और अपनी राय लिखें! हो सके तो follower भी बने! इससे आप ब्लोगिग परिवार के सम्पर्क में रहेगे! अच्छा पढे और अच्छा लिखें! हैप्पी ब्लोगिग!

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  2. अदम में थी मेरी रूह जसदे खाकी से पहले,
    मुझे कौन जानता था मेरी ज़िंदगी से पहले|

    मेरी ज़िंदगी में है वहम ऐ खुदा! तेरा,
    जो मैं न होता 'शकील' तो तू क्या खुदा होता|

    bahut khoob likha hai, blog duniya men aapka swagat hai

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  3. हिंदी ब्लाग लेखन के लिए स्वागत और बधाई
    कृपया अन्य ब्लॉगों को भी पढें और अपनी बहुमूल्य टिप्पणियां देनें का कष्ट करें

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  4. बूँद बोली सागर से --
    मेरे होने में है संदेह, अये सागर! तेरा.
    जो मैं न होती बूँद, तो क्या सागर होता? ................. [चिंतन का पहला पड़ाव]

    खाने को पेट में ले जाना था.
    उसको पकाना तो एक बहाना था. ............................ [हल्का शेर]

    गहरायी नहीं थी बिलकुल गड्ढा खोदने से पहले.
    मज़दूर हूँ कौन जानता था कुदाल लेने से पहले. ........ [ज़मीनी शेर]

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  5. मैं गुनाहों, सबाब का वो मीज़ान हूँ 'शकील',
    है खुदा पर भी यकीं और शैतान पर भी भरोसा मेरा|
    ????

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  6. शक़ील साहब,
    आपकी सोच में ऊँचाई और गहराई साथ-साथ हैं।
    बात में दम है,
    शिल्प में थोड़ा सा कुछ - कहीं कम है।
    आपके अश'आर बह्र के पैमाने पर थोड़ा सा कसते नहीं, मगर तब भी मज़ा ख़ूब आ रहा है। अगर पूरे छन्द-मात्रा भी सही हो जाएँ तो क्या ही कहना!

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  7. सचमुच बात में दम है। ...चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है। आपके ब्लाग पर आकर अच्छा लगा। हिंदी ब्लागिंग को आप और ऊंचाई तक पहुंचाएं, यही कामना है।
    इंटरनेट से घर बैठे आमदनी की इच्छा हो तो यहां पधारें-
    http://gharkibaaten.blogspot.com

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  8. इस चिट्ठे के साथ हिंदी चिट्ठा जगत में आपका स्‍वागत है .. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाएं !!

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  9. " बाज़ार के बिस्तर पर स्खलित ज्ञान कभी क्रांति का जनक नहीं हो सकता "

    हिंदी चिट्ठाकारी की सरस और रहस्यमई दुनिया में राज-समाज और जन की आवाज "जनोक्ति.कॉम "आपके इस सुन्दर चिट्ठे का स्वागत करता है . चिट्ठे की सार्थकता को बनाये रखें . अपने राजनैतिक , सामाजिक , आर्थिक , सांस्कृतिक और मीडिया से जुडे आलेख , कविता , कहानियां , व्यंग आदि जनोक्ति पर पोस्ट करने के लिए नीचे दिए गये लिंक पर जाकर रजिस्टर करें . http://www.janokti.com/wp-login.php?action=register,
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